
5 जुलाई 2026 · Spirituality
वह घर, जिसे हम भूल बैठे
घर उसे कहते हैं जहाँ हमारे अपने बसते हैं। पर हमारा सबसे अपना है कौन? त्वमेव माता च पिता त्वमेव के भाव को आधार बनाकर यह लेख कहता है कि ईश्वर ही हमारी माता है, पिता है, बंधु है और सखा है, और इसीलिए तीर्थ ही हमारा सच्चा घर हैं। सेवा हमें घर से दूर रख सकती है, जैसे उसने हनुमान जी को प्रभु के भक्तों की सेवा हेतु धरती पर रोक लिया। पर प्रायः हम किसी प्रयोजन से निकलते हैं, उसे भुला बैठते हैं, और मोह में एक झूठा घर रच लेते हैं। यह लेख सहजता से स्मरण कराता है कि सच्चा घर कहाँ है, और उस ओर लौटने का निमंत्रण देता है।
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